उत्तराखंड में अब ईमेल के माध्यम से भी एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है। पुलिस मुख्यालय ने आरटीआई कार्यकर्ता नदीम उद्दीन को यह जानकारी दी।
काशीपुर । प्रदेश के थानों में एफआइआर ई-मेल के माध्यम से भी दर्ज कराई जा सकती है। इसके लिये उत्तराखंड के अधिकतर थानों के प्रभारियों की ई-मेल आइडी पुलिस विभाग की अधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
यह जानकारी उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय के लोक सूचना अधिकारी द्वारा सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन को उपलब्ध करायी गयी सूचना में दी गयी है।
काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन एडवोकेट ने उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय के लोक सूचना अधिकारी से उत्तराखंड के सभी थानों के थाना प्रभारी/प्रभारी निरीक्षकों के कार्यालयों की ई-मेल आइडी की सूची जिन पर ई-मेल भेजकर एफआइआर दर्ज करायी जा सकती हैं,
की सूचना चाही थी। इसके उत्तर में लोक सूचना अधिकारी/पुलिस अधीक्षक प्रो./मोर्ड. ममता बोहरा एवं पुलिस अधीक्षक एससीआरबी विशाखा अशोक भदाणे ने जानकारी उपलब्ध कराई। संबंधित थानों की मेल आइडी uttarakhandpolice.uk.gov.in पर उपलब्ध है।
सरल फौजदारी कानून तथा बीएनएस का परिचय सहित 46 कानूनी व जागरूकता पुस्तकों के लेखक नदीम उद्दीन ने बताया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173 के अंतर्गत इलेक्ट्रानिक सूचना द्वारा किसी भी पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को संज्ञेय (गंभीर) अपराधों की एफआइआर/रिपोर्ट करने का प्रावधान किया गया है। इसके लिये उत्तराखंड सरकार द्वारा उत्तराखंड भारतीय नागरिक सुरक्षा नियमावली 2024 में विस्तृत प्रावधान किये गये हैं। इससे एफआइआर दर्ज कराने के नाम पर उत्पीड़न व भ्रष्टाचार तथा सिफारिशों के आरोपों में भी कमी आएगी।
ईमेल मिलने के बाद ये होगा
उत्तराखंड भारतीय नागरिक सुरक्षा नियमावली 2024 के नियम 9(4) के अनुसार इलेक्ट्रानिक संचार माध्यम से प्राप्त संदेश को डाउनलोड करके थाने के कम्प्यूटर में रखा जाएगा तथा ई-शिकायत रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा।
थाना प्रभारी परिवादी को शिकायत पर हस्ताक्षर करने संदेश देने के तीन दिनों के भीतर पुलिस थाने में आने के लिये इलेक्ट्रानिक माध्यम से सूचित करेगा, ताकि कानून के अनुसार आगे कार्यवाही की जा सके।
यदि शिकायतकर्ता संदेश ई-मेल से भेजने के तीन दिन के बाद उपस्थित होता है, तो इसे नई जानकारी के रूप में मानते हुए कार्यवाही की जाएगी।
सूचना किसी गंभीर अपराध को इंगित करती है तो पुलिस थाने का प्रभारी या तो स्वयं या किसी उपनिरीक्षक या उससे उच्च स्तर के अधिकारी को अपराध स्थल पर तत्काल जाने और आवश्यक कानूनी कार्यवाही करने को निर्देशित करेगा।
