देहरादून: विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड में 2 लाख से ज्यादा युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है. इन युवाओं को सरकार खेल के माध्यम से ग्राम, ब्लॉक, तहसील और जिला स्तर पर जोड़ने का काम करेगी. धामी सरकार का यह बड़ा कार्यक्रम जैनजी आंदोलन के ठीक बाद होने जा रहा है. जिसमें युवा खेलों के माध्यम से कार्यक्रम में प्रतिभाग करेंगे. सरकार का लक्ष्य प्रदेशभर में 2 लाख से ज्यादा युवाओं को खेल महाकुंभ के माध्यम से जोड़ने का है.
युवाओं को खेलों से जोड़ने के लिए इस बार खेल महाकुंभ को बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी है. खेल एवं युवा कल्याण विभाग की ओर से प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में युवाओं तक पहुंच बनाने के साथ ही अधिक से अधिक रजिस्ट्रेशन कराने पर जोर दिया जा रहा है. इसके लिए संबंधित विभागों और अधिकारियों को भी लक्ष्य दिए गए हैं, ताकि आयोजन में अधिक से अधिक युवा प्रतिभाग कर सकें.
दरअसल उत्तराखंड में खेल महाकुंभ केवल खेल प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं है. इसके जरिए गांव और दूरदराज के क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें आगे बढ़ाने का भी प्रयास किया जाता है. ग्राम स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताओं से प्रतिभागी न्याय पंचायत, विकासखंड, तहसील और जिला स्तर की प्रतियोगिताओं तक पहुंचते हैं. इसके बाद बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को राज्य स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलता है.
इस बार सरकार की कोशिश है कि खेल महाकुंभ में युवाओं की भागीदारी पिछले आयोजनों की तुलना में कहीं अधिक हो. इसके लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को व्यापक स्तर पर चलाया जा रहा है. विभाग का मानना है कि खेलों के जरिए युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने के साथ ही प्रदेश में नई खेल प्रतिभाओं की पहचान भी की जा सकेगी.
खेल एवं युवा कल्याण विभाग की निदेशक दीप्ति सिंह के मुताबिक खेल महाकुंभ को लेकर विभाग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं. आयोजन को सफल बनाने के लिए अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक सितंबर को टनकपुर से खेल महाकुंभ का शुभारंभ करेंगे. इसके बाद प्रदेशभर में एक महीने तक अलग-अलग स्तर पर खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा.
खेल महाकुंभ 1 सितंबर से शुरू होकर 30 सितंबर तक चलेगा. इस दौरान गांव से लेकर न्याय पंचायत, विकासखंड, तहसील और जिला स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी. अलग-अलग खेलों में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों को अपने प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा. इस पूरी प्रक्रिया के जरिए सरकार की नजर प्रदेश की उन प्रतिभाओं पर भी रहेगी, जो संसाधनों के अभाव में अभी तक बड़े मंच तक नहीं पहुंच पाई है.
सरकार की ओर से 2 लाख से ज्यादा युवाओं को इस आयोजन से जोड़ने का लक्ष्य इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि प्रदेश में युवाओं की बड़ी आबादी है. खेलों के प्रति लगातार रुचि बढ़ रही है. गांवों में होने वाली प्रतियोगिताओं के जरिए स्थानीय स्तर पर खिलाड़ियों को मंच मिलने की उम्मीद है.
जैनजी आंदोलन के दौरान युवाओं की बड़ी संख्या में भागीदारी और उनके मुद्दों को लेकर सामने आए आक्रोश के बीच सरकार का यह अभियान राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी अहम माना जा रहा है.
