नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने उत्तराखंड सरकार के 2026-27 के बजट को निराशाजनक और दिशाहीन बताया है।
देहरादून। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत वर्ष 2026-27 के बजट को पूरी तरह निराशाजनक, दिशाहीन और जमीनी सच्चाइयों से कटा हुआ बताया है।
उन्होंने कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों की बाजीगरी और पुराने वादों की पुनरावृत्ति भर है, जिसमें नई सोच, ठोस योजनाओं और दूरदर्शिता का अभाव दिखाई देता है।
आर्य ने कहा कि केंद्रीय सहायतित योजनाओं पर आधारित यह बजट जनता के साथ एक और छलावा है।
युवाओं, किसानों, व्यापारियों, मध्यम वर्ग और गरीबों को इससे कोई राहत नहीं मिली है। सरकार ने पुरानी घोषणाओं को नए रूप में पेश कर विकास का भ्रम पैदा करने का प्रयास किया है, जबकि वास्तविकता में आगे भी केवल डीपीआर बनाने का सिलसिला ही चलता रहेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन के कारण प्रदेश पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2016-17 में राज्य पर लगभग 35 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था, जो अब बढ़कर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
यह स्थिति चिंताजनक है और सरकार उत्तराखंड के इतिहास में सबसे अधिक कर्ज लेने वाली सरकार बन गई है।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि डबल इंजन सरकार विकास कार्यों पर बजट खर्च करने में भी असफल रही है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मूल बजट का लगभग 50 प्रतिशत और कुल बजट का करीब 45 प्रतिशत ही खर्च किया जा सका है, जिससे स्पष्ट है कि सरकार के विकास संबंधी दावे खोखले हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं है।
महंगाई व बेरोजगारी बढ़ाने वाला चुनावी बजट : गोदियाल
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राज्य सरकार के मुखिया पुष्कर सिंह धामी की ओर से वर्ष 2025-26 के लिए प्रस्तुत बजट को दिशाहीन, प्रतिगामी, विकास विरोधी तथा महंगाई व बेरोजगारी बढ़ाने वाला चुनावी बजट बताया है।
गोदियाल ने धामी सरकार की ओर से प्रस्तुत बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व वाली सरकार का यह बजट केवल चुनावी वर्ष में घोषणाओं का पुलिंदा है, जिसमें प्रदेश की जनता की मूल समस्याओं के समाधान की कोई स्पष्ट झलक दिखाई नहीं देती।
प्रदेश में लगातार बढ़ती बेरोजगारी आज सबसे बड़ी चुनौती है, लेकिन बजट में युवाओं को स्थायी रोजगार देने के लिए कोई ठोस और प्रभावी योजना नहीं दिखाई देती।
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में पलायन एक गंभीर समस्या बन चुका है, परंतु बजट में पलायन रोकने के लिए भी कोई प्रभावी रणनीति नजर नहीं आती।
राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पहले से ही चिंताजनक है। पर्वतीय क्षेत्रों में अस्पतालों में डॉक्टरों और आवश्यक संसाधनों की भारी कमी है, फिर भी बजट में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं किए गए हैं।
इसी प्रकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार, सरकारी विद्यालयों को सुदृढ़ करने तथा शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए भी बजट में ठोस कदमों का अभाव है।
